
1
टिहरी चुप है पर एकदम मौन नहीं। झींगरों की झनझनाती आवाजें, घास और पत्तों की सरसराहट, भूली बिसरी समृति का अकेलापन और एक निश्चित अंतराल के बाद हिलोरे मारती भागीरथी की आवाज यहां अब भी मौजूद है। टिहरी चुप है पर बिलकुल मौन नहीं। मन की तरह।
टिहरी , 22.feb.1999